बिहार के पहले हिंदी अखबार 'बिहार बंधु' के संपादक रहे कमला प्रसाद वर्मा जी की आज पुण्यतिथि है। 1912 ईस्वी में 'बिहार बंधु' का संपादन कमला प्रसाद वर्मा (मुख्तार, पटना सिटी) करने लगे। आप दिन में पटना सिटी कोर्ट में मुख्तारी करते, रात में बांकीपुर जाकर पत्र का संपादन। इस कार्य हेतु आपको 50 रुपये मासिक वेतन तथा 10 रुपये मासिक भत्ता मिला करता। जलपान का खर्च और मार्गव्यय अलग से। मुख्तार साहब के बाद कुछ दिनों तक बल्लभ सम्प्रदाय के गोस्वामी जी को पत्र का संपादक बनाया गया। आशा थी कि उनके चेले और अनुयायी अखबार की मांग बढ़ाने में मदद करेंगे किन्तु ग्राहक संख्या बढ़ने की अपेक्षा बहुत घट गयी। इसी बीच अंग्रेज महिलाओं के संबंध में कुछ अपमानजनक समाचार छप गया। कमिश्नर ओल्ढम आगबबूला हो गये। संपादक की बुलाहट हुई। गोस्वामी जी चंपत हो गये। अतएव अनुरोधवश मुख्तार साहब को पुनः संपादन का भार स्वीकार करना पड़ा। आचार्य शिवपूजन सहाय ने 19 जनवरी, 1961 ई. की अपनी एक टिप्पणी में ठीक ही लिखा है कि मुख्तार साहब ने 'बिहार बन्धु' का दो बार संपादन किया था ।
बिहार राष्ट्रभाषा परिषद से छपी 'हिन्दी साहित्य और बिहार' (तृतीय खंड) में 'भूलती भागती यादें' (1951 में प्रकाशित) से एक उद्धरण है जिसमें कहा गया है कि "सन 1872 ईस्वी में बिहार बन्धु का जन्म कलकत्ते में, स्वर्गीय पं. बालकृष्ण भट्ट के निरीक्षण में हुआ था। इसमें पं. केशवराम भट्ट का बड़ा हाथ था। ये दोनों महाराष्ट्री ब्राह्मण थे और इनके पूर्वज 'बिहारशरीफ' में आ बसे थे।" (पृष्ठ 169) अब यह निर्विवाद है कि 'बिहार बन्धु' 1872 में नहीं बल्कि 1873 में शुरू हुआ। दूसरी बात कि बालकृष्ण भट्ट की जगह मदनमोहन भट्ट लिखा जाना चाहिए था। ये दोनों सगे भाई थे और महाराष्ट्रीय ब्राह्मण थे जो व्यापार के सिलसिले में 'बिहारशरीफ' आकर बस गये थे। 'बिहार बन्धु' की स्थापना इन्हीं मदनमोहन भट्ट की देखरेख में हुई थी। जहांतक बालकृष्ण भट्ट की बात है, उनके पूर्वज मालवा के ब्राह्मण थे और झाँसी के निकट आकर बसे थे। बालकृष्ण भट्ट, मालवीय जी के रिश्तेदार थे और जो 'हिन्दी प्रदीप' के संपादक हुए।
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